अमेरिका के संसद में पहली बार कोई मुस्लिम समुदाय से नेता पहुंचा है. अब्दुल अल सैयद ने मिशिगन से जीत हासिल की. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन प्राप्त रिपब्लिकन के माइक रोजर्स को हराया. अल सैयद ने अमेरिका सीनेट के लिए चुने जाने के बाद इतिहास रच दिया. यह अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है. वे डेमोक्रेट्स सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह लेंगे.
पेशे से डॉक्टर एक मजबूत राजनेता के तौर पर उभरे अब्दुल का भारत से भी नाता है. उनपर डोनाल्ड ट्रंप ने जिहादी होने का आरोप मढ़ा था. इस सीट पर पूरे अमेरिका की नजर थी. अब्दुल रहमान मोहम्मद अल सैयद को अब्दुल अल सैयद के नाम से भी जाना जाता है. उनका जन्म और पालन पोषण मिशिगन के मेट्रो डेट्रॉइट में हुआ था. पिता मिस्र से आकर अमेरिका में बस गए थे.
“From InshaAllah to Alhamdulillah,” Abdul El-Sayed announced his victory to become the first Muslim senator in the US Senate and made history. https://t.co/GLMI3jjHV5
— MOT Report (@motreportmr_) November 4, 2026
मेडिकल की पढ़ाई से लेकर राजनीति तक का सफर
अब्दुल ने अपनी एजुकेशन मिशिन यूनिवर्सिटी से बायोलॉजी और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है. इसके बाद उन्होंने रोड्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. 2014 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स से अपनी मेडिकल की डिग्री पूरी की. वह एक एमडी हैं. लेकिन एक लाइसेंस प्राप्त और प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर नहीं है.
राजनीति में आने से पहले अल सैयद ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में Epidemiology (महामारी विज्ञान) में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर काम किया.
उनकी रिसर्च पब्लिक हेल्थ सिस्टम और हेल्थ से जुड़ी असमानताओं पर केंद्रित था. इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स के मुताबिक, उन्होंने साइंटिफिक रिसर्च पेपर भी लिखे. स्वास्थ्य से जुड़े सुधारों पर काम किया.
अल सैयद ने अपनी पढ़ाई और रिसर्च पूरी करने के बाद पब्लिक लाइफ में कदम रखा. 2015 में उन्हें हेल्थ डिपार्टमेंट का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया. वह देश के किसी बड़े शहर के सबसे कम उम्र के हेल्थ अधिकारियों में से एक बन गए.
2022 से 2025 तक वेन काउंटी के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ, ह्यूमन एंड वेटरन्स सर्विसेज के निदेशक के रूप में काम किया.
पिता मिश्र के, भारतीय मूल की लड़की से शादी
उनकी पत्नी का नाम सारा है. उनकी दो बेटियां है. एल सैयद ने सारा जुकाकू से शादी की. यह एक साइकियाट्रिस्ट हैं. दोनों मिशिगन में पढ़ाई के दौरान मिले थे. उनके पिता मोहम्म मिस्र से आकर बसे थे. उनकी सौतेली मां, जैकलीन का परिवार लंबे समय से मिशिगन से जुड़ा हुआ था. अब्दुल ने हमेशा से ही अपने कार्यकाल के दौरान हेल्थ सर्विस की पहुंच को बढ़ाने पर फोकस किया. सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करने और कामकाजी महिलाओं पर पड़ने वाले फाइनेंशियल प्रेशर को कम करने की वकालत की. उनके इन्हीं प्रगतिशील विचारों को सपोर्ट मिला. इनमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस शामिल हैं.
अब्दुल सैयद का भारत से प्रत्यक्ष तौर पर किसी तरह का रिश्ता नहीं है. हालांकि, उनकी पत्नी सारा जुकाकू का परिवार कर्नाटक से ताल्लुक रखता है. वह मंगलुरु से लगभग 140 दूर है. सारा जुकाकू शमसुद्दीन की पोती हैं. तत्कालीन सीएम वीडी जत्ती के ऑफिस में मैसूर राज्य में वित्त उप मंत्री के तौर पर उन्होंने काम किया था.
ट्रंप ने लगाए थे वामपंथी और जिहादी होने के आरोप
इधर, ट्रंप ने उनपर वामपंथी होने के आरोप लगाए. उनके मोहम्मद नाम का जिक्र करने के साथ जिहादी कहा था. इस पर सैयद ने कहा कि मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह मेरा नाम कैसे बोलते हैं. मुझे इस बात की भी परवाह नहीं है कि उन्हें मेरा नाम याद है, या नहीं. क्योंकि नवंबर के बाद तो वो मुझे सीनेटर कहकर ही बुलाएंगे. तो भाई आपके लिए मैं सीनेटर मोहम्मद हूं.














