विधान परिषद चुनाव के नतीजों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बीजेपी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है. बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि जब नतीजे पक्ष में आते हैं तो अखिलेश इसे जनसमर्थन बताते हैं, लेकिन जब जनता नकारती है तो वो संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं. प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने शिक्षा व्यवस्था और समान नागरिक संहिता (UCC) के मुद्दे पर अखिलेश को घेरा. वहीं, डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने सपा सरकार के कार्यकाल में भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि तब बिना पर्ची के नौकरी नहीं मिलती थी.
‘सपा शासन में बदहाल थी शिक्षा व्यवस्था’
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि सपा सरकार के दौरान शिक्षकों की नियुक्तियां समय पर नहीं होती थीं और स्कूलों में भवन तक नहीं थे. कई जगह छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर थे. उन्होंने अखिलेश सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि तब बेटियां स्कूल जाने से डरती थीं. दिनेश सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि सपा और शिक्षा एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं. अखिलेश को शिक्षा व्यवस्था पर बोलने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए.
‘सपा हार स्वीकार करे, UCC पर बीजेपी प्रतिबद्ध’
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि MLC चुनाव में बीजेपी की सीटें और मत प्रतिशत बढ़े हैं. उन्होंने सपा से नतीजे स्वीकार करने और निर्वाचन आयोग पर भरोसा स्पष्ट करने को कहा. UCC पर संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए त्रिपाठी ने कहा कि राहुल गांधी के साथ अखिलेश संविधान की किताब तो लहराते हैं, लेकिन उसे गंभीरता से पढ़ते नहीं हैं. उन्होंने दावा किया कि एनडीए की सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में UCC लागू किया जाएगा.
‘सपा सरकार में योग्यता की होती थी अनदेखी’
बीजेपी प्रवक्ता डॉ. अंकुश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में भर्ती प्रक्रिया में योग्यता की अनदेखी होती थी और आयोगों में एक खास जाति के लोगों को प्राथमिकता दी जाती थी. उन्होंने सपा सरकार को ‘पर्ची-खर्ची’ वाली सरकार बताते हुए कहा कि युवाओं को नौकरी पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती थी. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार हर जिले में विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज बनाने की दिशा में काम कर रही है. त्रिपाठी ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में तीसरी बार एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी.














