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सर्दियों में यूरोप पर गैस आपूर्ति संकट का खतरा, सिर्फ इतना रह गया ‘एनर्जी स्टोरेज’


यूरोप को लेकर एक गंभीर खतरे की चेतावनी जारी की गई है. इसकी वजह है, कि आने वाले समय में अगर किसी तरह भी एनर्जी सप्लाई में रुकावट आती है, तो पूरे यूरोप के लिए संकट खड़ा हो जाएगा. अलजजीरा के रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के चीफ फतिह बिरोल ने कहा है कि यूरोप निम्न स्तर के गैस भंडार के साथ सर्दियों में प्रवेश कर रहा है. अगर किसी तरह का एनर्जी सप्लाई में रुकावट आता है, तो यह उसके लिए बेहद ही चिंताजनक स्थिति में डाल सकता है. यूरोप इस तरह के किसी भी झटके को बर्दाश्त नहीं कर सकेगा. 

बिरोल ने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा कि हॉर्मज में एनर्जी सप्लाई में आ रही रुकावट का असर सभी इलाकों पर है, लेकिन बाकियों के मुकाबले यूरोप पर इसका खतरा ज्यादा है. यूरोप को एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. भले ही खाड़ी मुल्कों के बीच फिर से शांति पसर जाए. 

सीजफायर के लिए कल अच्छा दिन था: बिरोल
एनर्जी सेक्टर में इकोनॉमिस्ट बिरोल का मानना है कि सीजफायर के लिए अच्छा दिन कल था. आमतौर पर सर्दियों से पहले यूरोपीय देशों के पास गैस का भंडार होता है. लेकिन इस बार सर्दियों की शुरुआत में हमारे पास गौस भंडार है, वह ऐतिहासिक तौर पर बेहद कम है. मुझे लगता है कि अगर सर्दियां बहुत कड़ाके की रहीं, तो यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं. इस साल और अगले साल भी यूरोप के हालात आसान नहीं रहने वाले हैं. 

कितना है फिलहाल यूरोप का गैस भंडार?

यूरोप का गैस भंडार 72 प्रतिशत है. यह सामान्य तौर पर 90 प्रतिशत तक ही भरा रहता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गैस की कमी इतनी है कि इससे 10 से 12 मिलियन घरों को एनर्जी दी जा सकती है. यूरोपीय संघ के एनर्जी मिनिस्टर इस पर विचार कर रहा हैं कि क्या उन्हें घरों और व्यवसायों से गैस की खपत सीमित करने के लिए कहना चाहिए. बिरोल ने कहा है कि उन्होंने लंबे समय से हॉर्मुज पर निर्भर रहने वाले खतरों के बारे में सोचा था. उन्होंने कि उनकी एजेंसी में शामिल होने के इच्छुक लोगों से वे अक्सर इस तरह के सवाल पूछते थे. 

बाब अल मंदेब पर टेंशन बढ़ने से हालात और खराब

उन्होंने कहा है कि बाब-अल-मंदेब पर टेंशन बढ़ने से हालात और खराब हुए हैं. दुनिया के नेता आखिर सोचते क्या हैं ? मुझे इस बात से निराशा है कि सरकारों ने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए. अब हर कोई जल्दबाजी में कदम उठा रहा है. मीडिल ईस्ट के देश नई पाइपलाइन बना रहे हैं. मौजूदा पाइपलाइन का विस्तार कर रहे हैं, जो हॉर्मुज से होकर नहीं गुजरती है. लेकिन मेरी नजर में ये कोशिश बहुत पहले हो जानी चाहिए थी. 



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