अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यूक्रेन के साथ हथियार और खुफिया जानकारी साझा करने की अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में चल रही बातचीत में कोई प्रगति नहीं होने के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज और निराश थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, तीन दिवसीय दौरे पर मंगलवार को मुंबई पहुंचे रुबियो ने कहा कि लगातार बढ़ती मौतों और युद्ध के अन्य क्षेत्रों में फैलने की आशंका के कारण अमेरिका इसे खत्म करना चाहता है.
यूक्रेन नीति में नहीं हुआ बदलाव
यूक्रेन को लेकर अमेरिकी नीति में बदलाव की खबरों को खारिज करते हुए रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस मुद्दे पर लगातार खबरें आ रही हैं, जो सही नहीं हैं. रुबियो ने कहा कि कई देशों ने अमेरिका से मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग की है.
उन्होंने कहा कि फिलहाल रक्षा क्षेत्र में यह सबसे ज्यादा मांग वाला उत्पाद है. रुबियो ने कहा, “जब किसी देश को अमेरिका से इंटरसेप्टर मिसाइलें नहीं मिलतीं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन्हें मुहैया कराने से इनकार कर रहे हैं. हमें अपनी जरूरतों के लिए भी इनकी आवश्यकता होती है. दुनियाभर में अपने सैन्य ठिकानों पर तैनाती के लिए हमें कुछ न्यूनतम मानकों को पूरा करना होता है.” उन्होंने कहा, “दुनियाभर में हमारी व्यापक सैन्य तैनाती है और विभिन्न देशों में हमारे कई सैन्य प्रतिष्ठान रक्षा एवं वायु रक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं. इसलिए, यूक्रेन को जानबूझकर किसी भी चीज से वंचित नहीं किया जा रहा है.”
जयशंकर के साथ ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाह्यान ने मंगलवार को मुंबई में त्रिपक्षीय बैठक की. इसमें क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई.
रुबियो मंगलवार दोपहर मुंबई पहुंचे, जबकि अल नाह्यान सोमवार शाम भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए थे. अमेरिकी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा करने और हमारी साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और यूएई के विदेश मंत्री अल नाह्यान से मिलकर बहुत अच्छा लगा.”
वहीं, जयशंकर ने इस बैठक को ऊर्जा, संपर्क और समकालीन घटनाक्रमों पर विचारों का सार्थक आदान-प्रदान बताया. बताया जा रहा है कि तीनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया की समग्र सुरक्षा स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की. ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी किए जाने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में भारी व्यवधान पैदा हुआ है. इस जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है. यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. पश्चिम एशिया में तनाव अचानक बढ़ गया है.
खासकर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर हमला किए जाने के बाद क्षेत्र की स्थिति और गंभीर हो गई है. भारत ने सऊदी अरब के नागरिक बुनियादी ढांचे और आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हूती विद्रोहियों के हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है.
भारत ने कहा है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करते हैं और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करते हैं. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर भी हमला किया था. कच्चे तेल की आपूर्ति के लिहाज से इस पाइपलाइन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.














