अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला. ये तब हुआ है जब ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से खुद को इसके लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बता चुके हैं और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कई मौकों पर ट्रंप की शान में कसीदे गढ़ते आए हैं. हालांकि जिन्हें इस बार ये पुरस्कार मिला है उन्हें लेकर इजरायली सरकार हमलावर है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार दिए जाने की मांग की. शरीफ ने एक्स पर पिछले साल भारत पाकिस्तान के बीच चले 4 दिन के संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि ट्रंप ने दक्षिण एशिया में शांति को आगे बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और उनके समय पर किए गए हस्तक्षेप से भारत-पाकिस्तान को टकराव से वापस लाने और युद्धविराम सुनिश्चित करने में मदद मिली.
शहबाज शरीफ के मुताबिक उनके असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए पाकिस्तान ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था और वो ईमानदारी से आशा करते हैं कि उनके क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने और संघर्ष को रोकने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों को इस बार उचित सम्मान और मान्यता मिलेगी.
ट्रंप कबसे मांग रहे ये सम्मान
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) से ही नोबेल शांति पुरस्कार की मांग करते आए हैं. ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहना शुरू किया था कि वे इस पुरस्कार के हकदार हैं. उन्होंने दावा किया था कि किम जोंग उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने नोबेल समिति को उनके नाम का पत्र भेजा था.
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को जब नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया, तो उस दौरान भी ट्रंप ने कहा था कि शांति समझौता उन्होंने करवाया था, लेकिन श्रेय किसी और को मिला. 2025 में जब ये सम्मान वेनेजुएला की मारिया कोरीना माचाडो को दिया गया, तो ट्रंप और व्हाइट हाउस ने नोबेल समिति के फैसले पर सवाल उठाए थे.
इजरायल क्यों भड़का
अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए नोबेल समिति ने इस साल नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार दिया. इसे लेकर इजरायली विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अगर झूठ, नफरत और झूठे आरोपों के लिए कोई अवॉर्ड होता, तो नवी पिल्लई सिर्फ दावेदार नहीं बल्कि सबसे आगे रहने वाली उम्मीदवार होतीं.
बयान में आगे कहा गया कि इजरायल को लगातार राजनीतिक मकसद से बदनाम करने और नरसंहार को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका साफ तौर पर दिखती है. बयान में कहा गया कि पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार देना न्याय को सम्मान देना नहीं है. यह इजरायल-विरोधी नफरत और पूर्वाग्रह को सही ठहराने के लिए अवॉर्ड का बहुत ही बुरा इस्तेमाल है.
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