मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव हमेशा से ही बना रहता है. इसे लेकर अब एक नई स्टडी के आंकड़ों ने भी चौंकाने वाला खुलासा किया है. दरअसल नई दिल्ली के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्रों पर की गई रिसर्च में 77% छात्रों में मध्यम से लेकर ज्यादा तनाव पाया गया. पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने की चिंता, कम नंबर आने का डर और टीचर्स के सवालों का जवाब न दे पाने की चिंता छात्रों के तनाव की प्रमुख वजहों में शामिल रही. यह स्टडी इंडियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित हुई, इसमें दिल्ली की एक सरकारी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के चारों वर्षों के 406 छात्रों को शामिल किया गया है. रिसर्च में से नवंबर 2025 के बीच 18 से 25 साल की उम्र के छात्रों पर की गई थी
स्टडी के अनुसार 54.43 प्रतिशत छात्रों ने मध्यम स्तर के तनाव की जानकारी दी, जबकि 22.66 प्रतिशत छात्र हाई स्ट्रेस की स्थिति में थे. वहीं करीब 22.9 प्रतिशत छात्रों को हल्का तनाव पाया गया. इस तरह तीन-चौथाई से ज्यादा छात्र मध्यम या उच्च स्तर के तनाव से गुजर रहे थे. रिसर्च में सामने आया कि छात्रों के लिए सबसे बड़ा तनाव पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था. इसके अलावा शिक्षक के सवाल का जवाब न दे पाना, कम अंक आना और बड़ी मात्रा में कोर्स पूरा करने की चिंता भी उन्हें परेशान करती रही है. कई छात्रों ने यह भी महसूस किया कि उनकी मेहनत को पर्याप्त पहचान नहीं मिलती है.
ये भी पढ़ें-दिल्ली जिला अदालत में नौकरी पाने का मौका, DSSSB ने निकाली 641 वैकेंसी
सेकंड ईयर के छात्रों में हाई स्ट्रेस ज्यादा
अलग-अलग वर्ष के छात्रों को देखने पर सेकंड ईयर में हाई स्ट्रेस का अनुपात सबसे ज्यादा 30.11% रहा. हालांकि रिसर्चर्स ने कहा कि अलग-अलग बैच के बीच अंतर भी इसका बड़ा कारण हो सकता है. इसलिए इसे मेडिकल की पढ़ाई के दौरान तनाव बढ़ने का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता. स्टडी में छात्रों के स्ट्रेस और हाई रेट वैरायबिलिटी के बीच भी संबंध देखा गया. हल्के, मीडियम और ज्यादा तनाव वाले छात्रों में HRV में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला. वहीं एडजस्टमेंट के बाद सेकंड ईयर की तुलना में फाइनल ईयर के छात्रों में आरएमएसएसडी नाम के HRV माप में 29.1% कमी देखी गई, लेकिन अलग-अलग वर्षों में इसका पैटर्न एक जैसा नहीं था.
सिर्फ पढ़ाई नहीं इमोशनल मजबूती भी जरूरी
स्टडी के प्रमुख लेखक डॉ. मोहित गुप्ता के अनुसार छात्रों से केवल यह पूछना पर्याप्त नहीं है कि वह तनाव में है या नहीं. उनके अनुसार स्ट्रेस को व्यवस्थित तरीके से आकलन करने के साथ मेडिकल एजुकेशन में उससे निपटने की रणनीति भी शामिल करने की जरूरत है. उन्होंने मेडिकल शिक्षा को ज्यादा समावेशी, व्यावहारिक और संतुलित बनाने के साथ छात्रों के मनोरंजन और दूसरे गतिविधियों की गुंजाइश बढ़ाने पर भी जोर दिया. उनका कहना है कि छात्रों को एकेडमी रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ इमोशनल रूप से स्थिर रखना भी जरूरी है, ताकि वह जरूरत पड़ने पर मदद ले सके और तनाव से निपट सकें.
ये भी पढ़ें-नजदीक आ रही है UP स्कॉलरशिप की आखिरी तारीख, जल्द से जल्द करें आवेदन
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

















