जम्मू-कश्मीर में पिछले दो सालों में अचानक आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं से बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. राज्य में 24,000 से ज्यादा घरों और 5,000 से ज्यादा सड़कों को नुकसान पहुंचा है. सरकार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी, जिसमें इन दो वित्तीय वर्षों के दौरान हुए नुकसान का ब्योरा मांगा गया था.
आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण विभाग के लिखित जवाब के अनुसार, 2025-26 और 2026-27 के दो वित्तीय वर्षों के दौरान जम्मू डिवीजन में 23,470 घरों और 5,084 सड़कों को नुकसान पहुंचा. उधमपुर में सबसे ज्यादा 6,997 घर क्षतिग्रस्त हुए, इसके बाद राजौरी में 4,781 और जम्मू में 2,718 घर क्षतिग्रस्त हुए.
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कश्मीर डिवीजन में भी हुआ नुकसान
कश्मीर डिवीजन में 946 घरों और 289 सड़कों के साथ-साथ 513 जलापूर्ति योजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की सूचना मिली. आपदा से खेती को भी नुकसान पहुंचा. जम्मू डिवीजन में लगभग 99,300 हेक्टेयर और कश्मीर डिवीजन में 7,021 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ.
जम्मू जिले में लगभग 30,728 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ, जबकि कश्मीर डिवीजन में कुलगाम और बडगाम में क्रमशः 3,472 हेक्टेयर और 1,764 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ. सरकार ने दोनों डिवीजनों में 5,244 पशुओं के नुकसान की भी जानकारी दी.
सरकार ने दी यह जानकारी
सरकार ने बताया कि 2025-26 के दौरान क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को अस्थायी रूप से ठीक कर दिया गया था और स्थायी मरम्मत का काम चल रहा है. 2026-27 के दौरान प्रभावित बुनियादी ढांचे को आंशिक रूप से ठीक कर दिया गया है और स्थायी मरम्मत का काम जारी है.
सरकार ने कहा कि पुनर्वास के लिए कोई विशेष वित्तीय पैकेज या अलग राहत पैकेज मंजूर नहीं किया गया है, लेकिन प्रभावित लोगों को SDRF नियमों के तहत मदद दी जा रही है. प्रभावित इलाकों में ढांचे को हुए नुकसान के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष का भी इस्तेमाल किया गया, जिसमें किश्तवाड़, पुंछ और राजौरी में लाभार्थियों को दी गई मदद भी शामिल है.
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